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Saturday, September 11, 2010

स्मैक के नशे में धुंआ होती तराई की जवानी

तराई में सफेद नशे का काला कारोबार युवाओं को अपने शिकंजे में कसता जा रहा है।
                             (जहांगीर राजू रुद्रपुर से)

तराई में सफेद नशे का काला कारोबार लगातार फैलता जा रहा है। जिसके चलते स्मैक के नशे में तराई की जवानी धुंआ हो रही है। यहां के युवा अफीम, स्मैक व हेरोइन के नशे के शिकंजे में फंसते जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि तराई में औद्योगिकरण बढऩे के साथ ही यहां चरस, अफीम स्मैक व हेरोइन का काला कारोबार भी अचानक बढ़ा है। ऊधमसिंह नगर जिले के नेपाल व उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़े रहने के कारण यहां बड़े पैमाने पर तस्कर सक्रिय हैं। यह तस्कर नेपाल व यूपी से स्मैक व हेरोइन लाकर तराई के युवाओं को नशे का शिकार बना रहे हैं। स्थिति यह है कि स्मैक व हेरोइन की तस्करी के चलते तराई में बढ़े पैमाने पर युवा सफेद नशे के आदि हो रहे है।
पुलिस के आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो वर्ष 2009 में 51 लोगों को स्मैक, अफीम, हेरोइन व चरस की तस्करी करते पकड़ा गया। जिसमें 23 जनवरी 2009 को पंतनगर पुलिस ने बागपत उत्तर प्रदेश निवासी अरविलंद तोमर को 80 ग्राम हेरोइन के साथ गिरतार किया था। 26 जनवलरी को पंतनगर पुलिस ने सिडकुल तिराहे के नेवाबगंज बरेली निवासी नेम चन्द्र से 7.5 लाख रुपये की हेरोइन बरामद की थी। 2 फरवरी को खटीमा पुलिस ने देवरी निवासी कृष्ण सिंह को 450 ग्राम चरस के साथ गिरतार किया था। 17 फरवरी को महेन्द्र नगर कंजनपुर नेपाल निवासी राजेन्द्र अवस्थी को नशे के ब्यूरोकीन के 700 इनजैक्शन बरामद किए थे। 19 मार्च करतारपुर चौराहे के पास से पुलिस ने बगवाड़ा निवासी बलजीत सिंह को 37 पुडिय़ा अफीम के साथ गिरतार किया था। 21 अप्रैल को आवास निवास रुद्रपुर से पुलिस ने शिवपुरी बरेली निवासी लक्ष्मण सिंह को 18 पुडिय़ा स्मैक के साथ गिरतार किया था। 
2 मई को पुलिस ने मिलक रामपुर निवासी हर प्रसाद को 650 ग्राम अफीम के साथ गिरतार किया था। 9 जून को ट्रांजिट कैंप में पुलिस ने केसीघाट झारखंड निवासी दिनेश को 2 किलो 750 ग्राम अफीम के साथ गिरतार किया था। 12 अगस्त को पुलिस ने सितारगंज निवासी गुरमेज सिंह को 25 पुडिय़ा स्मैक के साथ गिरतार किया था। 13 अगस्त को हल्दुआ सितारंगज निवासी अजय कुमार को पुलिस ने 20 स्मैक की पुडिय़ा के साथ पकड़ा था। 14 सिंतबर को मलसी सितारंगज निवासी ऋषिपाल को पुलिस ने 20 पुडिय़ा स्मैक के साथ गिरतार किया था। इसी प्रकार वर्ष 2010 में अबतक पुलिस 35 लोगों को अफीम, चरस, स्मैक व हेरोइन के साथ गिरतार किया है। जिसमें 28 जनवरी काशीपुर पुलिस ने अशोक विहार निवासी सुरेश अरोरा को 26 किलो डोडा के चूरे के साथ गिरतार किया था। 10 मार्च पुलिस ने दिनेशपुर मोड़ में कृष्ण कुमार सैनी 900 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। 27 मई पुलिस ने नानकमत्ता पुलिया के पास जसपुर निवासी कुलवंत सिंह को 5 स्मैक की पुडिय़ा के साथ गिरतार किया था। 6 जुलाई को दिनेशपुर पुलिस ने झारखंड निवासी प्रदीप को एक किलो अफीम के साथ गिरतार किया था।  12 जून को हल्दूआ सितारगंज निवासी भूप किशोर को पुलिस ने 25 पुडिय़ा स्मैक के साथ गिरतार किया था। 17 जून को पुलिस ने कानपुर निवासी जयप्रकाश को 70 पुडिय़ा स्मैक के साथ पकड़ा था। 23 जून हाथीखान सितारगंज निवासी गुरमेज सिंह को  पुलिस ने 15 पुडिय़ा स्मैक  के साथ पकड़ा था। 1 जुलाई सिंतारगंज में पुलिस ने बहेड़ी निवासी चन्द्रपाल को 30 स्मैक की पुडिय़ा के साथ पकड़ा था। 8 जुलाई को खटीमा पुलिस ने योगेश बाल्मिकी को 400 ग्राम स्मैक के साथ पकड़ा था।
इस प्रकार देखा जाए तो तराई में नशे का काला कारोबार लगातार फैलता जा रहा है। पुलिस की ओर से मामलों में की जा रही कार्रवाई के बाद भी यह करोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

Friday, September 3, 2010

उत्तराखंड में आर्किड के उत्पादन से स्वावलंबन

 राज्य में आर्किड के 240 प्राकृतिक प्रजातियां मौजूद

राज्य में उद्योग केे रुप में स्थापित हो सकती है खूबसूरत आर्किड के फूलों की खेती
                                            (जहांगीर राजू, रुद्रपुर से)

उत्तराखंड में खूबसूरत आर्किड के फूलों की खेती के माध्यम से बड़े पैमाने पर लोगों के रोजगार से जोड़ा जा सकता है। राज्य में आर्किड की 240 प्रजातियां मौजूद हैं। ऐसे में राज्य केे बेरोजगार युवाओं के लिए आर्किड क उत्पादन स्वावलंबन का माध्यम बन सकता है।
उल्लेखनीय है कि आर्किड के खूबसूरत फूलों की नार्थ इस्ट एशिया में बड़ी मांग है। विश्व भर में आर्किड के एक लाख से अधिक हाईब्रीड प्रजातियां हैं। उत्तराखंड की अगर बात की जाए तो  यहां की जलवायु आर्किड के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। जिसके चलते राज्य में प्राकृतिक रुप से खूबसूरत आर्किड के फूलों की 240 प्रजातियां हैं। पूरे हिमालयी क्षेत्र में इस फूल की 750 प्रजातियां मौजूद हैं। ऐसे में राज्य में आर्किड के फूलों के उत्पादन को एक उद्योग के रुप दिया जा सकता है। आर्किड के फूलों का उत्पादन कर इसे बड़े पैमाने पर विदेशों के निर्यात किया जा सकता है।
आर्किड पर शोध कर चुके डा.डीएस जलाल बताते हैं कि आर्किड ग्रुप की लोरिकल्चर के क्षेत्र में पूरे विश्व  में काफी मांग है। उत्तराखंड में 30 से 40 फीसदी आद्रता वाले क्षेत्रों में आर्किड का बेहतर उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में सिमडियम व डैन्ड्रोबियम प्रजाति के आर्किड प्रमुखता से पाए जाते हैं। इन आर्किड की कट लोवर के रुप में विश्व के फूल बाजार में काफी मांग है। वर्तमान में भारत में यह फूल हांगकांग से आयात किया जा रहा है। इस फूल की एक स्टीक 25 से 30 रुपये में मिलती है। एक फूल में इसकी 8 से 10 स्टीक तक होती हैं। उत्तराखंड से इस आर्किड को भारी मात्रा में निर्यात किया जा सकता है। साथ ही पोलबाइन आर्किड को पाकेट लोवर के रुप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि टिशू कल्चर के माध्यम से आर्किड का राज्य में अच्छा उत्पादन किया जा सकता है। जिससे आर्किड की गुणवत्ता के साथ ही उसका उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। डा. जलाल ने बताया कि बंग्लौर, केरल में आर्किड के उत्पादन को एक उद्योग के रुप किया जा रहा है।
 उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आर्किड को उद्योग के साथ ही पर्यटन से भी जोड़ा जा सकता है। डा. ललित तिवारी बताते हैं कि उत्तराखंड में आर्किड के उत्पादन को उद्योग का रुप दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बेहतर संभावना के बावजूद राज्य में आर्किड के कल्टीवेशन का कार्य अबतक शुरू नहीं हो पाया है। जबकि यहां पेड़ों में स्वेतरू पैदा होने वाली आर्किड की सैकड़ों प्राकृतिक प्रजातियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर जलवायु वाले क्षेत्र में आर्किड की खेती को मॉडल के रुप में कर उसे पूरे राज्य में विस्तार दिया जाना चाहिए।

Wednesday, September 1, 2010

तराई के लाल क्यों परदेशी हो गए ?

हर वर्ष पांच सौ से अधिक युवा बनवाते हैं पासपोर्ट


कनाडा जाने वाले युवाओं की संख्या सर्वाधिक


तराई से हर वर्ष बड़ी संख्या में युवाओं का विदेशों को पलायन हो रहा है। जिसमें से सैकड़ों की संख्या में युवा विदेश की नागरिकता ले रहे हैं।
                                                        (रुद्रपुर से, जहांगीर राजू)


तराई के युवाओं में विदेश जाकर नौकरी व व्यवसाय करने का रुझान लगातार बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति यह है कि तराई में हर वर्ष 500 से अधिक युवा विदेश जाने के लिए पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं जिसमें से 40 फीसदी से अधिक युवा विदेश जाकर नौकरी करते हैं। दो-चार साल तक नौकरी करने के बाद वह वहीं वी नागरिकता ले लेते हैं। जिसके चलते तराई से बड़े पैमाने पर बौद्धिक संपदा का पलायन हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि तराई के बड़े किसान परिवारों के युवाओं में विदेश में जाकर नौकरी करने का बड़ा क्रेज है। जिसका प्रमाण कलक्ट्रेट स्थित पासपोर्ट प्रकोष्ठ दे रहा है। प्रकोष्ठ से मिले आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो वर्ष 2006 में बरेली स्थित पास्पोर्ट दतर से 476, 2007 में 510, 2008 में 531 लोगों ने पासपोर्ट प्राप्त किए। रुद्रपुर कलक्ट्रेट में पास्पोर्ट प्रकोष्ठ बनने के बाद 2009 में 676 लोगों ने विदेश जाने के लिए पासपोर्ट प्राप्त किए। जबकि वर्ष 2010 में अबतक 221 लोगों ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया है। इन आवेदनों को पासपोर्ट कार्यालय देहरादून भेज दिया गया है। इन आंकड़ों के मुताबिक तराई में प्रतिवर्ष 500 से अधिक युवा विदेश जाने के लिए पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं। जिसमें से लगभग 200 से अधिक युवा हर साल नौकरी के लिए विदेश  जाते हैं। जिसमें से सर्वाधिक युवा कनाडा में जाकर नौकरी करते हैं। स्थिति यह है कि कनाडा के टोरेंटो शहर में तराई के 100 से अधिक परिवार रह रहे हैं। जिसमें से अधिकांश लोगों ने वहीं की नागरिकता ले ली है।
मूलरुप से रुद्रपुर निवासी स्पेन के प्रवासी भारतीय हरवंदर सिंह धारीवाल बताते हैं कि उनके परिवार के सात सदस्य स्पेन में रहकर नौकरी व अपना व्येह्लसाय करते हैं। उनका स्पेन में रेस्टोरेंट है। वह कहते हैं कि तराई के युवाओं का विदेशों के प्रति आकर्षण बढऩे का मुख्य कारण वहां के सिस्टम में पारदर्शिता होना है। वह कहते हैं कि यहां के सिस्टम का पचास साल बाद भी पारदर्शी बनना मुश्किल है। वह कहते हैं कि जबतक देश में फैला भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो जाता तबतक बेहतर व्यवस्था की उम्मीद करना बेमानी है। वह बताते हैं कि किसी देश का मंत्री एक आम आदमी के पीछे खड़ा होकर ट्रेन का टिकट खरीदता है, उस सिस्टम के प्रति युवाओं का आकर्षण बढऩा लाजमी है। वह उम्मीद करते हैं कि यहां का सिस्टम भी पारदर्शी बने और लोग विदेश जाने के बजाए अपने देश में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।

विदेशी पासपोर्ट प्राप्त करने का आकंड़ा                                             
   
  वर्ष                 संख्या

   2006                476

   2007                 510

   2008                531

   2009                 676

2010 में अबतक     221                   कनाडा में तराई के सर्वाधिक परिवार

रुद्रपुर। मूलरुप से रुद्रपुर बगवाड़ा निवासी कनाडा के प्रवासी भारतीय साहब सिंह विलर्क बताते हैं कि कनाडा में तराई के सर्वाधिक परिवार रहते हैं। वह कहते हैं कि वहां तराई के अधिकांश युवा डाक्टर, इंजीनियर वल व्यवसायी हैं। वह बताते हैं कि कनाडा में टैक्सी चलाने वाला चालक प्रतिदिन पांच हजार रुपये तक की कमाई कर लेता है। जबकि डाक्टर व इंजीनियर 45 से 50 लाख प्रतिवर्ष की कमाई कर लेते हैं। वह कहते हैं कि बेहतर रोजगार व अच्छा सिस्टम होने के कारण ही यहां के युवा विदेशों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। वह बताते हैं कि कोई भी दुर्घटना होने पर तीन मिनट के भीतर एंबुलेंस, फायर व पुलिस की टीम का पहुंच जाना वहां की बेहतर व्यवथाओं को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि कनाडा में सबसे अधिक पंजाब के लोग रहते हैं। जिसके चलते वहां 9 सांसद व 30 विधायक पंजाबी हैं। इसीलिए कनाडा को अब मिनी पंजाब के रुप में भी जाना जाने लगा है।