Thursday, September 23, 2010

तराई में जाने कहां से आ गया एड्स

एचआईवी संक्रामित रोगियों की संख्या 18१ पहुंची

सात वर्ष में 15 से अधिक एड्स रोगियों की मौत

           जहांगीर राजू (रुद्रपुर से)

तराई में एड्स के एचआईवी संक्रामित रोगियों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। जिले में एड्स से अबतक 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। तराई में हो रही एड्स रोगियों की मौत से स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे जन जागरुकता अभियान को आईना दिखा दिया है। इस प्रकार देखा जाए तो औद्योगिक नगरी रुद्रपुर में एड्स का सिकंजा फैलता जा रहा है।

गौरतलब है कि रुद्रपुर व काशीपुर में शुरु हुए औद्योगिकरण के बाद से ही यहां एड्स रोगियों की संख्या में हर वर्ष बढ़ोत्तरी हो रही है। एड्स विशेषज्ञ डा. राकेश कुमार के मुताबिक जिले के शहरी क्षेत्रों में बाहरी लोगों का आवागमन बढऩे के कारण ही एड्स रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। जिसमें उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों व वाहन चालकों की संख्या अधिक होती है। देखा जाए तो वर्ष 2003 से जिले में राष्ट्रीय एड्स कंट्रोल प्रोग्राम शुरू हुआ। कार्यक्रम शुरू होने के बाद वर्ष 2003 में जिले में एचआईवी संक्रामित रोगियों की संख्या मात्र 2 थी। वर्ष 2004 में यह संख्या 8, 2005 में 8, 2006 में 10, 2007 में 29, 2008 में 3२ वर्ष 2009 में 49 तथा वर्ष 2010  में अबतक जिले में एड्स संक्रामित रोगियों की संख्या 30 तक पहुंच गयी। इस प्रकार देखा जाए तो जिले में  अबतक एचआईवी पीड़ित 18१ रोगियों की पहचान हुई हैं, जिसमें से 15 से अधिक रोगियों की मौत हो चुकी है। जिले में मौजूद एचआईवी संक्रामित रोगियों में सबसे अधिक रोगी रुद्रपुर में है। इसके बाद काशीपुर में सबसे अधिक एचआईवी संक्रामित रोगी हैं।
 तराई में लगातार हो रही एड्स पीड़ित रोगियों की मौत ने सरकार की ओर से चलाए जा रहे जन जागरूकता अभियान की कलई खोलकर रख दी है। जानकारी के अभाव में एड्स रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जागरुकता न होने के कारण पिछले दिनों एक महिला को एड्स रोगी होने की जानकारी जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद मिली, जिसकी बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी। तबतक महिला का पति व बेटा भी एड्स से संक्रामित हो चुका था। समय के रहते यदि महिला के परिवार को एड्स के खतरों का पता चल जाता तो शायद पति व बच्चे को एड्स रोगी होने से बचाया जा सकता था।
राष्ट्रीय एड्स कंट्रोल कार्यक्र्रम के प्रोग्राम अधिकारी डा.आरके पांडे ने बताया कि रुद्रपुर व काशीपुर में औद्योगिकरण के चलते बाहरी क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। जिसके चलते क्षेत्र में एड्स रोगियों की संख्या बढ़ रही है। साथ ही जिले में रुद्रपुर के बाद जसपुर, काशीपुर व खटीमा में आईसीटीएल सेंटर खुलने के बाद अधिक रोगियों की पहचान हुई है।
 उन्होंने बताया कि जिले के किच्छा व सितारगंज क्षेत्र में आईसीटीएल सेटर खुलने के बाद इन रोगियों की संख्या में और अधिक बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने बताया कि एड्स की रोगथाम के लिए विभाग की ओर से जन जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से सेक्स वर्करों को एड्स के प्रति जागरुक किया जा रहा है।


2 comments:

  1. bahut gambheer isharaa hai aapke lekh me.

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  2. ददा ब्लाग का बैकग्राउंड कलर बदलों साफ पढ़ने में नहीं आ रहा है। पीला वाला मैटर पढ़ने में खासी परेशानी हो रही है।

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