Saturday, April 30, 2011

महाराजा रुद्र ने बनाया ऐतिहासिक अटरिया देवी मंदिर

ऐतिहासिक अटरिया देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ती ही जा रही है

(जहांगीर राजू रुद्रपुर)

तराई के लोगों की आस्था का प्रतीक बन चुके ऐतिहासिक अटरिया देवी मंदिर की स्थापना चंद राजाओं के वंशज महाराजा रुद्र ने की थी। जिसके बाद से ही इस मंदिर में नवरात्र पर मेला लगता है, जो 17 दिनों तक चलता है। मंदिर में लगने वाले मेले में हर वर्ष दो लाख से भी अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं।
उल्लेखनीय है कि रुद्रपुर स्थित अटरिया देवी का मंदिर ऐतिहासिक होने के साथ ही मां दुर्गा के मानने वालों के लिए आस्था के द्वार के रुप में जाना जाता है। इतिहासकार शक्ति प्रसाद सकलानी बताते हैं कि अग्रसेन अस्पताल के पास 16वीं सदी में महाराजा रुद्र का किला हुआ करता था। जहां से वह आसपास के क्षेत्रों में शिकार करने जाया करते थे। किंवदंति हैै कि एक दिन महाराजा रुद्र शिकार करने के लिए आसपास के जंगल में निकल गए थे। जंगल में बरगद के पेड़ के पास उनके रथ का पहिया फंस गया था। काफी देर तक रथ वहां से नहीं निकला को महाराजा को पेड़ के नीचे नींद आ गयी।
 इस दौरान उन्हें सपना आया कि  बरगद के पेड़ के पास मां दुर्गा की मूर्ति कि वह प्राण प्रतिष्ठा कर मंदिर का निर्माण कराएं। जिसके बाद महाराजा रुद्र ने बरगद के पेड़ के पास दुर्गा की मूर्ति की स्थापना कर मंदिर का निर्माण कवाया। जिसके बाद से ही मंदिर में नवरात्र पर हर वर्ष 17 दिन तक मेला लगता है। वर्तमान में मंदिर में दुर्गा के साथ ही काली, हनुमान व भैरव की मूर्ति की स्थापित है। इस मंदिर में हर वर्ष तराई व उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से दो लाख से भी अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में 17 दिन तक चलने वाले मेले में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले व्यवसायी हर वर्ष लाखों रुपये का कारोबार करते हैं। अपनी प्रसिद्धि के चलते अटरिया देवी मंदिर में लगने वाले मेले का स्वरुप हर वर्ष भव्य होता जा रहा है। मेला प्रबंधक अरविंद शर्मा व पुजारी महंत पुष्पा देवी ने बताया कि मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले हर व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन बरगद के पेड़ पर धागा बांधकर महिलाएं जो भी मनोती मांगती हैं वह अवश्य पूरी होती है।

इस वर्ष मंदिर में जुटे लाखों श्रद्धालु

रुद्रपुर। मां अटरिया देवी मंदिर में नवरात्र पर शुरु हुए इस मेले में इस वर्ष भी दो लाख लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। इस वर्ष यह मेला 30 अप्रैल तक चला। मंदिर की पुजारी महंत पुष्पा देवी ने बताया कि नवरात्र पर मंदिर में पूजा अर्चना करने का खास महत्व है। इस दिन मंदिर में पूजा अर्जना कर जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है।

1 comment:

  1. इस ऐतिहासिक तथ्य की तरफ ध्यानाकर्षण करने के लिए धन्यवाद.. बड़े दुर्भाग्य की बात है कि रुद्रपुर शहर में उसे बसाने वाले राजा रूद्र चंद का कोई स्मारक या प्रतिमा नहीं है...

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